समानांतर साहित्य उत्सव की जरूरत

राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ साहित्य के कॉरपोरेटीकरण-बाजारीकरण के विरुद्ध 27 से 29 जनवरी तक त्रिदिवसीय समानान्तर साहित्य उत्सव का आयोजन करने जा रहा है। प्रगतिशील लेखक संघ का मानना है कि आर्थिक उदारवाद के नाम पर पिछले लगभग तीस बरस से दुनिया पूंजीवाद के क्रूर जबड़ों में समाती जा रही है, जिसने हर मानवीय पवित्रता और रचनात्मकता को एक उत्पाद में बदल दिया है। साहित्य अब मनुष्य की बेहतरी के लिए नहीं, बल्कि बाजार को खुश करने के लिए लिखा जा रहा है। यही हाल अन्य कलाओं का भी है। प्रगतिशील लेखक संघ का मानना है कि आज दुनिया भर में नवफासीवाद का दौर है। वर्चस्ववादी और अधिनायकवादी ताकतें, साम्प्रदायिक शक्तियों और हथियारों की अंधी होड़ ने हमारी समकालीन दुनिया को बर्बर बना दिया है। हमारा देश भी इससे अछूता नहीं हैं।
साहित्य के नाम पर दुनिया भर में जो ‘लिट फेस्ट कल्चरÓ विकसित की जा रही है, वह वस्तुत: साहित्य और कलाओं को मनोरंजन के बाजार में बदल रही है। ‘लिट फेस्ट कल्चरÓ के नाम पर ‘फैशन परेडÓ की तर्ज पर अब देश के हर बड़े-छोटे शहर और कस्बे में जो ‘साहित्यिक उत्सवÓ आयोजित किए जा रहे हैं, वे दरअसल अपसंस्कृति के उत्सव हैं। लेखकों के नाम पर गैर लेखकों, अभिनेताओं, सेलिब्स, मसखरों, अवसरवादियों और व्यापारियों को लेखकों-बुद्धिजीवियों की तरह पेश किया जा रहा है। प्रगतिशील लेखक संघ किसी भी भाषा के विरुद्ध नहीं है, लेकिन जिस तरह यह ‘लिट फेस्ट कल्चरÓ अंग्रेजी का वर्चस्व स्थापित करने में
लगी है, प्रगतिशील लेखक संघ का मानना है
कि इसमें उत्तर-औपनिवेशिक संस्कृति की
झलक दिखाई देती है। प्रगतिशील लेखक संघ हिंदी, उर्दू, पंजाबी, राजस्थानी और अन्य भारतीय भाषाओं में हो रहे विश्व स्तरीय लेखन को रेखांकित करते हुए गुलेरी, मुक्तिबोध, नंद चतुर्वेदी और विजयदान देथा की परंपरा को आगे बढ़ाना चाहता है।
इस समारोह में देश के विख्यात लेखक हिस्सा लेंगे। साथ ही राजस्थान के दूर दराज के इलाकों से कोई 100 अतिथि लेखक इस साहित्य उत्सव मेंभाग लेने के लिए आ रहे हैं। तीन दिन चलने वाले ‘समानांतर साहित्य उत्सवÓ में कुल 24 सत्र होंगे। ये सत्र कविता, कहानी, आलोचना, राजनीति, अर्थशास्त्र, किसान, दलित, आदिवासी-बहुजन, हिंदी, उर्दू, राजस्थानी, पंजाबी और सिंधी आदि भाषाओं के होंगे। इस त्रिदिवसीय समारोह में हर शाम नाटक, हिंदी-उर्दू कविता पाठ, संगीत और सिनेमा का प्रदर्शन रहेगा। राजस्थान की लोक कलाओं और लोक संगीत को भी समारोह में तरजीह दी जाएगी। प्रगतिशील लेखक संघ द्वारा आयोजित इस समारोह के अध्यक्ष ऋतुराज और महासचिव ईशमधु तलवार तथा कृष्ण कल्पित को फेस्टिवल का संयोजक बनाया गया है।

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