छत्तीसगढ़ में 24 घंटे में 172 जूनियर डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया, वेतन और सुविधा नहीं मिलने से नाराजगी

कोरोनावायरस संक्रमण के दौरान छत्तीसगढ़ में जूनियर रेसीडेंट डॉक्टरों ने इस्तीफे की झड़ी लगा दी है। 24 घंटे में रायपुर समेत रायगढ़ और सिम्स बिलासपुर से 172 डॉक्टर इस्तीफा दे चुके हैं। ये सभी वेतन नहीं मिलने, तरीके से ड्यूटी लगाने और कोविड वार्ड में सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिलने से नाराज हैं। डॉक्टरों ने इसे लेकर कई बार परेशानी भी जाहिर की। इसके बावजूद उनकी मांगों को लेकर ध्यान नहीं दिया गया। रायपुर में उच्चाधिकारियों से भी जूनियर डॉक्टरों ने मुलाकात कर समस्याएं बताई थीं, मगर उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
सिम्स के डॉक्टर बोले- वेतन मिले, ग्रामीण सेवा अवधि को शामिल किया जाए
बिलासपुर सिम्स के 50 जूनियर डॉक्टरों ने गुरुवार शाम को इस्तीफा दे दिया। इसके बाद देर रात तक 42 और डॉक्टरों ने दे दिया। डॉक्टरों का कहना है कि डीएमई के आदेश और सिम्स डीन के निर्देश पर इंटर्नशिप पूरा करने के बाद उन्हें बतौर जूनियर रेसीडेंट पदस्थ किया गया था। कोरोना महामारी के मद्देनजर जरूरत पड़ी तो वे मार्च में इंटर्नशिप पूरा होने के बावजूद पिछले 2 महीनों से लगातार सेवाएं दे रहे हैं। उनका कहना है कि जान जोखिम में डालकर वो सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन दो माह से उन्हें वेतन नहीं दिया जा रहा है। डॉक्टरों ने ग्रामीण सेवा अवधि को भी इसी में जोड़ने की मांग की है।

रायगढ़ में बुधवार रात से ड्यूटी नहीं कर रहे डॉक्टर, डीन बोले- सोशल मीडिया से पता चला
रायगढ़ में भी लखीराम अग्रवाल मेडिकल कॉलेज के 45 जूनियर रेसीडेंट डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया है। यहां भी डॉक्टर वेतन नहीं मिलने के साथ गलत तरीके से ड्यूटी लगाने और कोविड वार्ड में सुरक्षा और सुविधाएं नहीं मिलने से नाराज हैं। फिलहाल, डॉक्टर बुधवार रात से ड्यूटी पर नहीं जा रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि उनको मिलने वाले वेतन में गड़बड़ी है। कोरोना वार्ड में ड्यूटी के दौरान उन्हें ही आगे किया जाता है। सीनियर गायब रहते हैं। पीपीई किट भी सुरक्षा के लिहाज से नहीं दी गई है। इसको लेकर कई बार शिकायत भी की गई।

हालांकि, जूनियर डॉक्टर इस्तीफा देने की बात तो स्वीकार करते हैं, लेकिन खुलकर कुछ बोलने को तैयार नहीं हैं। वहीं, मेडिकल कॉलेज के डीन पीएम लूका का कहना है कि डॉक्टरों की परेशानी को दूर किया जा रहा है। वेतन विसंगति उनकी अलग-अलग समय पर ज्वाइनिंग के कारण है। डीएमएफ फंड से उन्हें वेतन दिया गया था। अब प्रशासन को आगे के लिए अवगत कराया गया है। उन्होंने कहा कि अभी उनको किसी डॉक्टर का इस्तीफा नहीं मिला है। इस्तीफे की जानकारी भी उन्हें सोशल मीडिया से मिली है। यह भी कहा है कि डॉक्टर चाहें तो इस्तीफा दे सकते हैं।

एक दिन पहले रायपुर में 15 डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया था
इससे पहले बुधवार को रायपुर स्थित पं. जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में दो माह से वेतन नहीं मिलने से नाराज 15 जूनियर रेसीडेंट डॉक्टरों ने इस्तीफा दिया था। इसके बाद गुरुवार को भी 20 डॉक्टरों ने इस्तीफा दे दिया। डॉक्टर चिकित्सा शिक्षा संचालनालय के अफसरों से मिलने गए थे। शिकायत पर अफसरों से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर के बाद इस्तीफा देने का फैसला लिया था। इनमें स्टेट और ऑल इंडिया कोटे से एमबीबीएस कर रहे छात्र शामिल हैं। जूनियर रेसीडेंट की कोरोना ओपीडी से लेकर आईसोलेशन वार्ड में ड्यूटी करवाई जा रही है। कोरोना संकट को देखते हुए ही मार्च में इंटर्नशिप पूरा करने वाले एमबीबीएस छात्रों को जूनियर रेसीडेंट बना दिया था।

प्रदेश में ऐसे 383 छात्र, जिन्हें जूनियर रेसीडेंट बनाया, पर वेतन तय नहीं
प्रदेशभर में ऐसे 383 छात्र थे, जिन्हें जूनियर रेसीडेंट बनाया गया था। पोस्टिंग तो कर दी गई लेकिन अब तक उनका वेतन तय नहीं किया गया है। रायपुर के अलावा राजनांदगांव, रायगढ़, जगदलपुर में ऐसे डाक्टरर सेवाएं दे रहे थे। जूनियर रेसीडेंट डाक्टरों का कहना है कोरोना ओपीडी से लेकर आइसोलेशन वार्ड में उनकी ड्यूटी लगाई जा रही है। सिम्स बिलासपुर की एक जूनियर रेसीडेंट डाक्टर कोरोना संक्रमित हो चुकी है। उनका इलाज बिलासपुर कोविड अस्पताल में चल रहा है। वहीं, डीकेएस अस्पताल में सेवाएं दे रहीं संविदा और दैनिक वेतनभोगी नर्सों को भी दो माह से वेतन नहीं मिला है।

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