भारतरत्न अटल बिहारी वाजपेयी

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का छत्तीसगढ़ से गहरा नाता रहा। उनकी यादों की खुशबू समूचे प्रदेश में बिखरी हुई है। यादों की यह सुगंध कायम रहे, इसके लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने अहम फैसला लिया है, जिसके तहत सरकार स्मार्ट सिटी नया रायपुर का नाम अटल नगर करने के साथ नया रायपुर में स्व.अटल बिहारी वाजपेयी का भव्य स्मारक व पांच एकड़ में संग्रहालय बनाने जा रही है, जहां अटल जी की यादों से जुड़ी सामग्री व समान रखा जाएगा। रायपुर सेंट्रल पार्क का नाम भी अटल पार्क होगा और प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में वाजपेयी की प्रतिमा लगायी जाएगी। राज्य में 27 जिला हैं यानि 27 प्रतिमा लगायी जाएंगी। इसके साथ ही उनके सम्मान से शिक्षा क्षेत्र को भी जोड़ा गया है। अब छत्तीसगढ़ पाठ्य पुस्तक निगम की किताबों में अटल की जीवनी और कविता को शामिल किया जाएगा। बिलासपुर विश्वविद्यालय का नाम अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय तथा राजनांदगांव मेडिकल कॉलेज और मेडिकल कॉलेज रायपुर आडिटोरियम का नाम अटल बिहारी वाजपेयी होगा। नेरोगेज वे एक्सप्रेस का नाम अटल पथ होगा। अटल जी के कार्यकाल में हुआ पोखरण विस्फोट एक महत्वपूर्ण घटना थी। इसकी स्मृति को जीवित रखने के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस की एक बटालियन को पोखरण बटालियन का नाम दिया गया है। जांजगीर चाम्पा जिला में स्थित मड़वा थर्मल पावर प्लांट का नाम भी अटल बिहारी रखा गया है। इसके अलावा अटलजी के नाम पर कई पुरस्कार दिये जाने की घोषणा की गयी है। प्रत्येक वर्ष, 1 नवम्बर को राज्योत्सव मनाया जाता है। इस वर्ष से हर राज्योत्सव के दिन, नगरीय और ग्रामीण निकायों को पुरस्कृत किया जाएगा। चयनित ग्राम, नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम, जिला पंचायत को अटल सुशासन पुरस्कार दिया जाएगा। पुरस्कार त्रिस्तरीय होगा। जनपद स्तर पर, प्रत्येक जनपद, एक ग्राम तथा प्रत्येक संभाग स्तर पर, एक जनपद, एक नगर पंचायत, एक नगर पालिका व राज्य स्तर पर एक जिला पंचायत और एक नगर निगम को पुरस्कार मिलेगा। 25 दिसंबर को अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म हुआ था। हर साल इसी दिन राष्ट्रीय स्तर के एक कवि का सम्मान किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार अटलजी के विशाल व्यक्तित्व को देखते हुए उनकी याद में और और भी घोषणाएं हो सकती हैं। गौरतलब है कि अटल आवास जैसी कई योजनाएं पहले से ही संचालित हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी के सम्मान में कई काम किये जाने का इरादा तभी झलका था, जब उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण में उनकी भूमिका को याद करते हुए अत्यंत भावुक शब्दों में कहा कि छत्तीसगढ़ का निमार्ता नहीं रहा।
दरअसल मुख्यमंत्री के कहे शब्द, छत्तीसगढिय़ों की भावना और उनके हृदय में अटलजी के स्थान का प्रतिनिधित्व करते हैं। राज्य केबिनेट के फैसले के पहले, अटलजी के करीबी रहे रमन सिंह ने, अटलजी और छत्तीसगढ़ के निमार्ण से जुड़ी यादों को आम जनों से साझा करते हुए, अपने एक लेख में साफतौर से कहा कि अटल नहीं होते तो छत्तीसगढ़ राज्य इतनी आसानी से नहीं बनता उन्होने अटलजी की स्मृति को बनाये रखने और अटल मार्ग पर चलने का वादा भी किया।
दरअसल अटल बिहारी वाजपेयी का व्यक्तित्व विशाल था। उनके प्रधानमंत्रित्व काल में छत्तीसगढ़ राज्य बनने से उनसे प्रदेशवासियों का आत्मीय रिश्ता और घना हो गया। जब उनकी याद को अमर बनाने के लिए कदम उठाये गए तो विपक्ष तक ने सरकारी फैसले का विरोध नहीं किया। लेकिन जब अस्थि कलश विसर्जन और शोक सभाओं में ठहाके लगाते हुए कुछ नेताओं की तस्वीरें और खबरे सामने आयीं तो अटलजी की भतीजी पूर्व सांसद करुणा शुक्ल ने अप्रसन्नता जाहिर करते हुए इतना जरूर कहा कि अटलजी की अंतिम यात्रा में पांच किलोमीटर पैदल चलने के बजाए अटल मार्ग पर दो कदम चलना ज्यादा बेहतर है। केवल चुनावी लाभ के लिए राजनीति नहीं होनी चाहिए। उल्लेखनीय है कि करुणा शुक्ल, बीजेपी की टिकिट पर जांजगीर लोकसभा से संसद चुनी गयी थीं, लेकिन नए परिसीमन के बाद जांजगीर आरक्षित सीट हो जाने से भाजपा ने उन्हे 2009 लोकसभा चुनाव में कोरबा लोकसभा से प्रत्याशी बनाया, लेकिन वे चुनाव हार गयीं। इसके बाद अपनी उपेक्षा से क्षुब्ध होकर उन्होने 2013 में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली और 2014 में कांग्रेस के टिकिट पर बिलासपुर लोकसभा से चुनाव लड़ीं, लेकिन हार गयीं। फिलहाल वे कांग्रेस में प्रदेश उपाध्यक्ष हैं, भाजपा से उनकी नाराजगी कई मौकों पर देखने में आयी है। प्रदेश में जारी अटलीकरण प्रसंग पर, नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंह जू देव ने चुटकी लेते हुए कहा कि सरकार को छत्तीसगढ़ का नाम अटल गढ़ कर देना चाहिए, लेकिन सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी, भावना के प्रवाह में बही जा रही है। राज्य सरकार की देखा-देखी शहरी और ग्रामीण निकाय अपने स्तर पर भी फैसले कर रहे हैं। हाल में बिलासपुर नेहरू चौक पर बन रही नगर घड़ी का नामकरण स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर किए जाने का निर्णय लिया गया है। कारगिल युद्ध के बाद छत्तीसगढ़ के कुछ गांवों में इक्का-दुक्का चौक को अटल चौक का नाम दिया गया था। अब यह सिलसिला तेजी से बढ़ा है। इससे लग रहा है कि बीजेपी कुछ ऐसा करने के लिए आतुर है जो अब तक किसी दल ने अपने नेता के लिए नहीं किया है।

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