एक आईएएस अफसर व्यापारी बनकर लगा अपनी कमाई के जोड़तोड़ में: आईएएस अफसर से विभाग के अधीनस्थ अफसर दहशत में:

छत्तीसगढ़ राज्य को बने ज्यादा वक्त नही हुआ है पर इस राज्य ने काफी कम समय में बहुत तेज गति से विकास की और छलांग लगाई है। सरकार और यहाँ के पदस्थ अफसरो की मेहनत के कारण ये सफलता आज छत्तीसगढ़ को मिली है।प्रदेश के चहुमुखी विकास के सपने को साकार करने के लिये बहुत से आईएएस जीतोड़ मेहनत करने में लगे है।साथ ही कुछ आईएएस विभागीय काम के अलावा सामाजिक कार्यो को भी बेहतरीन तरीके से करने ने लगे है।कोई नये अनुकरणीय कार्यो को अंजाम देने में लगा है वही दूसरी और ये आईएएस अपने विभाग को कमाई का जरिया बनाने में ही लगे है। बहुत कम समय की कलेक्टरी किये ये आईएएस महाशय अभी दो विभाग को देख रहे है।डायरेक्टर बनने के बाद भी कलेक्टरी का नशा आज भी चढ़ा हुआ है।

प्रदेश के अतिमहत्वपूर्ण विभाग में पदस्थ ये आईएएस महाशय अपने विभाग के अधीनस्थ लोगो को प्रताड़ित करने में ही लगा हुआ है।उनसे केवल विभागीय फण्ड की जानकारी लेना व उस फण्ड को कैसे व्यय करा जा सकता है इसके जोड़तोड़ में ही लगे रहते है।इस आईएएस की अपनी एक पूरी टीम है।जो साहब के अधीनस्थ अधिकारियो के पास नियम से हर दिन पहुचकर सप्लाई के कामो की पूछताछ करने में लगे रहते है।
विभाग के किस अफसर के पास कौन सा काम आया हुआ है वो इस आईएएस की पूरी टीम को पता रहती है।किस मद में कितनी राशि बची है उसको तत्काल व्यय करने की योजना बनाकर अपने आदमी को दिलवाने का काम इस आईएएस के द्वारा बेधड़क किया जाता है।5000 से लेकर करोड़ो के काम को हथियाने का काम में ये आईएएस लगा हुआ है।

इस विभाग के कुछ अफसरों का कहना है कि हम लोग इस आईएएस से त्रस्त हो चुके है।इनके आदमियो को काम नही दो तो साहब हमपर चढ़ बैठते है। और काम दो तो विभागीय जांच में हमारी कलम फसेंगी।कुल मिलाकर हम लोगो के लिये एक ओर गढ्ढा व एक ओर खाई की स्थिति बन गई है।हमे अपना घर परिवार चलाना है तो मरमर कर काम करना हमारी मज़बूरी है।इनका क्या है फसना तो हमारा हो रहा है।इस आईएएस पर काफी पहले गंभीर आरोप भी लग चुका है।इस आईएएस की प्रताड़ना से त्रस्त होकर एक अफसर ने सुसाइड भी किया था।

खाने के काम से लेकर हर छोटे बड़े काम के लिये इनके एजेंट निर्धारित है वो ही काम करेंगे।साहब का विशेष निर्देश है कि मेरे रहते तक यहाँ का हर काम मेरे लोग करेंगे।मैं अपने नियम कानून खुद बनाता हूँ।तुम लोग मेरा आदेश जिस दिन नही मानोगे उसदिन से तुम्हारा बुरा समय चालू हो जायेगा। इस विभाग के अधीनस्थ अफसर इस व्यापारी स्वरूप आईएएस अफसर से दहशत में है। डायरेक्टर साहब का फ़ोन अपने विभाग के अधिकारियो के पास अपने लोगो को काम देने के लिये तत्काल प्रभाव से किया जाता है।

इन साहब का एक एजेंट ऐसा है जो व्यक्ति एक है पर इसके चार नाम है। अलग अलग अधिकारियो के पास अलग नाम से मिलकर ऑर्डर लेना व कम काम करके पूरा पेमेंट लेना।इस आईएएस का कहना है कि सुई से लेकर हर सामान देने तक का काम मेरी टीम करेगी।ट्रेनिंग से लेकर हर काम के लिये मेरे पास लोग है। ये सारे काम इस विभाग में बेख़ौफ़ चल रहे है।ऐसा लगता है कि ये आईएएस ना होकर अपने आप में एक स्वचलित मॉल है।इस आईएएस की यही कार्यशैली रही तो सरकार के इस अति महत्वपूर्ण विभाग का मटियामेट होना लगभग तय ही है।चुनावी वर्ष में ये आईएएस कही सरकार के लिये गले की हड्डी ना बन जाये।

किस मद से पैसा निकालकर अपनी कमाई हो जाये।बस इसी काम में लगे इस आईएएस अफसर से जनहित के कामो की अपेक्षा करना अपने आप से बेईमानी होगी।
सात लोगो की टीम के एमडी बनकर ये आईएएस विभाग के सभी काम को अंजाम देने में लगा हुआ है।जब एक आईएएस खुद व्यापार करने में लग जाये तब उस राज्य का क्या हश्र होगा ये आप स्वयं सोच सकते है।
सरकार को ऐसे व्यापारी नुमा अफसरों को तत्काल हटाकर पदमुक्त करने की आवश्यकता है।

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