उपचुनाव में बजा विपक्ष का डंका

राजस्थान और पश्चिमी बंगाल से तीन लोकसभा और दो विधानसभा के उपचुनाव परिणाम आ चुके हैं। राजस्थान के अलवर और अजमेर लोकसभा और मांडलगढ़ विधानसभा और बंगाल में उलुबेरिया लोकसभा और 24 परगना जिला की नोआपाड़ा विधानसभा पर 29 जनवरी 2018 को मतदान हुआ था। हिंदी पट्टी के राज्य राजस्थान और गैर हिंदी पट्टी के प्रदेश पश्चिमी बंगाल में हुए उपचुनाव को वहाँ की सरकारों के अब तक के कामों का, लेखा-जोखा माना जा रहा है। इन दोनों राज्यों में महिला मुख्यमंत्री हैं। इनमें बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी साख बचाने में सफल रहीं, उनकी अगुवाई में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस, उलुबेरिया लोकसभा और नोआपाड़ा विधानसभा उपचुनाव जीतने में कामयाब रही हैं। उलुबेरिया लोकसभा सीट, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद के निधन के कारण खाली हो गई थी। इस क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस ने, स्व. सुलतान अहमद की पत्नी सजदा अहमद को मैदान में उतारा था। उन्होंने अपने निकटवर्ती प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी के अनुपम मलिक को 4 लाख 74 हजार वोट से हराया। टीएमसी की विजयी प्रत्याशी सजदा अहमद को 6 लाख 64 हजार 9 सौ 67 मत मिले, जबकि भाजपा के उम्मीदवार अनुपम मलिक 2 लाख 97 हजार 6 सौ 97 वोट पाकर दूसरे और माकपा उम्मीदवार सबीरुद्दीन तीसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली है, कांग्रेस प्रत्याशी मुदस्सर हुसैन वारसी चौथे स्थान पर रहे। वे अपनी जमानत तक नहीं बचा पाये। आम चुनाव 2014 में भी कांग्रेस चौथे स्थान पर थी। तब उसके उम्मीदवार आसीत मित्रा को 67 हजार 8 सौ 26 वोट मिले थे, जबकि उपचुनाव में कांग्रेस को 23 हजार 1 सौ 9 वोट ही मिले। कांग्रेस की तरह सीपीएम के वोट प्रतिशत में गिरावट आयी है। आम चुनाव 2014 में माकपा के प्रत्याशी सबीरुद्दीन ही थे तब उन्हें 3 लाख 69 हजार 5 सौ 63 वोट मिले थे और माकपा दूसरे स्थान पर रही थी। जबकि इस बार सीपीएम तीसरे नंबर रही। सीपीएम को 11.56 प्रतिशत वोट मिले जबकि आम चुनाव में उसे 31.15 प्रतिशत मत मिले थे। बंगाल में माकपा के गिरते ग्राफ ने वामपंथी खेमे की चिंता में और इजाफा ही किया है। उलुबेरिया से विजयी तृणमूल कांग्रेस के वोट में वृद्धि हुई है। 2014 के सामान्य चुनाव में उसके प्रत्याशी सुल्तान अहमद को 5 लाख 70 हजार 7 सौ 85 मत मिला था। जबकि उपचुनाव में उनकी पत्नी सजदा अहमद को तकरीबन दो लाख अधिक वोट मिले हैं।
नोआपाड़ा विधानसभा कांग्रेस के विधायक मधुसूदन घोष के निधन के कारण रिक्त हुई थी। उपचुनाव में तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी सुनील सिंह ने भाजपा के संदीप मिश्रा को 63 हजार वोट से पराजित किया। टीएमसी को 1 लाख 1 हजार 7 सौ 29 वोट मिले तो बीजेपी के पक्ष में 38 हजार 7 सौ 11 वोट गिरे। सीपीएम की उम्मीदवार गार्गी चटर्जी 35 हजार 4 सौ 97 वोट पाकर, तीसरे स्थान पर रही तो कांग्रेस 10 हजार 90 मत पा सकी और चौथे स्थान पर खिसक गई। उसके उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई। उपचुनाव परिणाम कांग्रेस के लिए सकते से कम नहीं हैं क्योंकि सन 2013 के विधानसभा चुनाव में यहाँ से कांग्रेस विजयी हुई थी।
चुनावी नतीजा आने के बाद तृणमूल कांग्रेस की जीत से ज्यादा चर्चा बीजेपी के प्रदर्शन को लेकर है। भाजपा लोकसभा और विधानसभा दोनों स्थानों पर दूसरे स्थान पर रही। उसका वोट प्रतिशत भी बढ़ा है। बीजेपी को उलुबेरिया लोकसभा के आम चुनाव 2014 में 11.5 प्रतिशत मत मिले थे जो उपचुनाव मे बढक़र 23.29 प्रतिशत हो गया है। बंगाल बीजेपी के प्रमुख अशोक परनामी ने पार्टी के मतों में हुए इजाफे पर खुशी जाहिर की है। सूत्रों के अनुसार, कभी वामपंथी गढ़ के नाम से चिन्हित इस राज्य में ममता बनर्जी के सत्ता सम्हालने के बाद, वामपंथी दल और कांग्रेस हाशिये पर हैं वही भाजपा अपनी पैठ बनाती चली जा रही है। जानकार इसे आने वाले समय में बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत मान रहे हैं।
राजस्थान उपचुनाव परिणाम की कथा बिलकुल अलग है। जहाँ बंगाल में सत्तारूढ़ दल टीएमसी उलुबेरिया लोकसभा उपचुनाव में कामयाबी दोहराने और विधानसभा सीट भी अपने पाले में करने में सफल रही। वहीं राजस्थान में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को तमाम कोशिशों के बाद, भाजपा का प्रदर्शन बंगाल की तुलना में दयनीय रहा हैं। यहाँ सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के हाथों से दोनों लोकसभा अजमेर और अलवर और मंडाला विधान सभा निकल गयी। अजमेर लोकसभा, केंद्रीय मंत्री सांवर लाल जाट, अलवर लोकसभा क्षेत्र में भाजपा सांसद महंत चंद्रनाथ और मांडला विधानसभा पर विधायक किर्ति कुमारी के निधन के कारण, 29 जनवरी 2018 को चुनाव हुए थे। इन तीनों सीट पर कुल 42 प्रत्याशियों ने भाग्य आजमाया इनमें सबसे ज्यादा 23 उम्मीदवार अजमेर लोकसभा से थे। अलवर संसदीय सीट से 11 और मांडल से 8 प्रत्याशी खड़े हुए थे। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार अजमेर और अलवर लोकसभा सीट के लिए क्रमश: 65.64 व 61.93 प्रतिशत तथा मांडलगढ़ विधानसभा के लिए 78.68 प्रतिशत मतदान हुआ। भारी मतदान को लेकर लोगों का कयास अलग-अलग था, लेकिन चुनावी जंग में भाजपा के तमाम दावों को धता बताते हुए कांग्रेस ने चुनावी बाजी मार दी।
अलवर से बीजेपी ने जसवंत सिंह यादव को मैदान में उतारा था। जसवंत यादव राजस्थान सरकार में केबिनेट मंत्री हैं। उनका कद देखते हुए पार्टी को उम्मीद थी कि वे चुनाव जीतेंगे, लेकिन मतदाताओं ने उन्हें पूरी तरह से नकार दिया। इस सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार कर्ण सिंह यादव विजयी रहे। उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी जसवंत सिंह यादव को 1 लाख 56 हजार 319 मत से पराजित किया। कांग्रेस को कुल 6 लाख 42 हजार 4 सौ 24 वोट मिले जबकि भाजपा के खाते 4 लाख 45 हजार 9 सौ 20 मत रहे। तीसरे स्थान पर रही आर पी आई (ए) 35 सौ 73 पर सिमट गयी।
अजमेर से कांग्रेस के ही रघु शर्मा जीते। उन्होंने भाजपा के राम स्वरूप लांबा को 84 हजार 1 सौ 62 वोटों से हराया। शर्मा को 6 लाख 5 हजार 23 और भाजपा प्रत्याशी लांबा को 5 लाख 21 हजार 4 सौ 27 मत मिले। सूत्रों के अनुसार लांबा ने टक्कर देने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन पार्टी नेताओं का अति आत्मविश्वास उन्हें ले डूबा। मांडल विधानसभा से कांग्रेस के विवेक धाकड़ ने बीजेपी के शक्ति सिंह को 12 हजार 9 सौ 74 वोट से हरा दिया। धाकड़ को 70 हजार 1 सौ 46 वोट और भाजपा के शक्ति सिंह हाडा को 57 हजार 170 मत मिले। निर्दलीय उम्मीदवार गोपाल मालवीय भी 40 हजार 4 सौ 70 वोट बटोरने में कामयाब रहे।
बजट के शोर के बावजूद भी उप चुनाव परिणाम, चर्चा का विषय बनना बताता है कि इन चुनावों का सियासी नजरिये से कितना महत्व था। पूरा दम लगाने के बाद भी बी जे पी की राजस्थान में शिकस्त ने पार्टी को चिंता में डाल दिया है। चुनाव प्रचार में मुख्यमंत्री सहित राजस्थान सरकार के लगभग सारे मंत्री अंतिम समय तक चुनाव क्षेत्र में डटे रहे और तो और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव प्रचार अभियान का हिस्सा बने। उन्होंने अपनी सभा में राजस्थान सरकार के कामों और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के समर्पण की जमकर तारीफ करते हुए मतदाताओं से पार्टी के पक्ष में वोट देने की अपील भी की थी, लेकिन इस बार मतदाताओं का मूड कुछ और था। अलवर और अजमेर लोकसभा क्षेत्र में आठ-आठ विधानसभा क्षेत्र हैं। इन सभी पर आम चुनाव 2014 में भाजपा को बढ़त मिली थी किंतु उपचुनाव 2018 में इन दोनों लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली सोलह विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस आगे रही है। इसके साथ ही मांडलगढ़ विधानसभा भी हाथ से निकल गई, यानि कुल सतरह विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा पीछे चली गयी है। गौर तलब है कि आम चुनाव 2014 में राजस्थान की 25 लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी जीती थी।
अजमेर, अलवर लोकसभा में मिली जीत से जहाँ कांग्रेस की दो सीट बढ़ी हैं वही भाजपा की घटी हैं। राजस्थान विधान सभा के इस वर्ष के
अंत में होने वाले चुनाव और अगले साल होने वाले आम चुनाव के पहले विधान सभा में एक सीट बढऩे और लोकसभा की दो सीट हासिल होने को कांग्रेसी हल्के में शुभ संकेत माना जा रहा है। गुजरात विधान सभा चुनाव के दौरान सक्रिय भूमिका निभाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के अनुसार बीजेपी की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। राजस्थान कांग्रेस
प्रमुख सचिन पायलट ने कहा कि परिणाम राज्य और केंद्र सरकार के खिलाफ जनादेश है। राजस्थान में पराजय के बाद पार्टी के अंदर मुख्यमंत्री के खिलाफ असंतोष देखने को मिला है। कतिपय विरोधी दबी जुबान से
चर्चा कराते हुए उनके विरुद्ध हवा बनाने मे लगे हैं, लेकिन हो रही आलोचनाओं से बेखौफ, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया के अनुसार उन्होंने पूरी मेहनत से अपने फर्ज को निभाया है और आगे भी निभाती रहेंगी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी उप चुनाव परिणाम को लेकर राजस्थान में हाल फिलहाल, किसी प्रकार के बदलाव से इंकार कर दिया है।

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