इमरान की बॉल पर शरीफ आउट

पाकिस्तान दुनिया का अकेला ऐसा देश है, जहां के शासक का भविष्य सबसे ज्यादा अनिश्चित है। पाकिस्तान बनने के बाद कई बार तख्तापलट हो चुका है और कई राष्ट्र्रपति, प्रधानमंत्री और सैन्य तानाशाह समय-समय पर सीखचों के पीछे जा चुके हंै और कुछ को तो वक्त जरूरत मुंह छुपाकर देश छोड़कर भाग जाना पड़ा। इनमें कुछ को सूलियों पर भी टांगा गया है और कुछ हिंसा या दुर्घटना के शिकार भी हुए हंै। अय्यूब खान, जुल्फिकार अली भुट्टो, याहिया खान, जनरल टिक्का खान, जनरल जियाउर रहमान, बेनजीर भुट्टो और जनरल मुशर्रफ आदि की लंबी सूची है। इस सूची में अब एक और नाम शरीफ का भी जुड़ गया है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ इस समय जेल की सलाखों में हंै, क्योंकि पनामा पेपर्स उनके गले पड़ गये। पाकिस्तान की एकाउंटबिलिटी कोर्ट ने उनको लंदन के एवन फील्ड अपार्टमेंट मामले में दोषी करार देते हुए दस साल, बेटी मरियम को सात साल और दामाद पूर्व सांसद सफदर को एक साल कैद की सजा सुनायी है। उनके बेटों-हसन और हुसैन को पहले ही भगोड़ा घोषित किया जा चुका है। अदालत के अनुसार अपार्टमेंट के चार फ्लैटों की खरीद काली कमाई से की गयी है। कोर्ट ने लंदन स्थित फ्लैटों को जब्त करने का हुक्म भी सुना दिया है।
नवाज शरीफ मुश्किलों से तब घिरे, जब अमेरिका के खोजी पत्रकार समूह आईसीआईजे ने 3 अप्रैल, 2016 को सार्वजनिक जीवन से जुड़े 140 लोगों की भ्रष्ट तरीके से अर्जित की गयी संपत्ति का खुलासा किया। इन नामी-गिरामी लोगों ने पनामा स्थित एक लॉ फर्म के जरिये विभिन्न देशों में धन खपाया हुआ है। पनामा पेपर्स के नाम से मशहूर इस दस्तावेज में नवाज शरीफ परिवार का नाम भी शामिल है। पनामा पेपर्स के अनुसार शरीफ ने टैक्स हैवन देशों में काले धन का निवेश किया है। उनके पुत्र हुसैन और हसन तथा पुत्री मरियम ने ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड में चार कंपनियां शुरू कीं, जिनके माध्यम से लंदन में छह बड़ी संपत्तियां खरीदीं। फिर इन संपत्तियों को गिरवी रखकर डाएचे बैंक से 79 करोड़ डॉलर का ऋ ण लिया। इसके अलावा बैंक ऑफ स्कॉटलैंड की मदद से दो अपार्टमेंट खरीदे। इस सौदे में अघोषित पैसा लगाया गया है। खुलासा होने के बाद नवाज शरीफ ने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा था कि पूरा मामला उनको फंसाने की साजिश है, लेकिन पनामा पेपर्स की जांच कर रही छह सदस्यीय संयुक्त समिति ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गयी अपनी रपट में कहा है कि नवाज शरीफ के प्रधानमंत्रित्व के दूसरे कार्यकाल में शरीफ परिवार ने मालिकाना हक वाली कंपनियों अजीजी स्टील, हिल मेंटल, फ्लैगशिप इन्वेस्ट लिमिटेड आदि के नाम से लंदन के एवन फील्ड में चार फ्लैट 16 और 16 ओ तथा 17 और 17 ए खरीदे। बताया जाता है कि नवाज की मुश्किलें तब और बढ़ गयीं, जब उनकी पुत्री मरियम ने सन् 2006 के लिए बनाये गए दस्तावेजों के लिए कैलिबरी फॉन्ट का प्रयोग किया, जबकि व्यावसायिक उपयोग के लिए इस फॉन्ट का उपयोग सन् 2007 से शुरू हुआ था। इन दस्तावेजों पर परिवार के अन्य सदस्यों के भी हस्ताक्षर हैं। कोर्ट ने इस छेड़छाड़ को गंभीरता से लिया और मरियम के खिलाफ फोर्जरी का मामला दर्ज हुआ। सजा सेपहले ही नवाज को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रधानमंत्री की कुर्सी छोडऩी पड़ी और चुनाव लडऩे पर भी रोक लग गई। अदालती निर्णय के बाद मरियम, जो आम चुनाव में पीएमएल नवाज के बतौर उम्मीदवार मैदान में थीं, के चुनाव लडऩे पर भी रोक लगा दी गयी। अब नवाज और मरियम जेल में हैं और चुनाव में इमरान की तहरीके इंसाफ पार्टी सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरी है। नवाज शरीफ और मरियम इसी उम्मीद में देश लौटे थे कि हो सकता है कि उन्हें जेल भेजने से उपजी सहानुभूति के सहारे उनकी पार्टी चुनाव जीत जाए और वे अपने लिए कुछ बेहतर स्थिति तैयार कर सकें, लेकिन सेना का गुप्त समर्थन मिलने से इमरान की पार्टी ने सबसे बड़ी पार्टी होने का परचम लहरा दिया और नवाज के लिए बची-खुची उम्मीदें भी खत्म हो गईं।
पनामा पेपर्स लीक से उजागर हुए आरोपों की जांच के लिए पनामा पेपर सामने आने के साथ ही तहरीके इंसाफ पार्टी के प्रमुख इमरान खान ने शरीफ से पद छोडऩे की मांग की और कार्यवाही के लिए लगातार दवाब बनाये रखा। इमरान खान के प्रशंसक उन्हें इसका श्रेय दे रहे हंै कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उन्होंने पूरी शिद्दत से लड़ाई लड़ी और तहरीके इंसाफ के दवाब के चलते ही शरीफ के खिलाफ मामले दर्ज हुए और उनके चुनाव लडऩे पर रोक लगायी गयी, लेकिन आलोचकों का मानना है कि इमरान की पीठ पर पाकिस्तान की सेना का हाथ है, जो इमरान को सामने रखकर पर्दे के पीछे से सारा खेल खेल रही है।
पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ फैसला आने के साथ ही सियासी भूचाल आना ही था। निर्णय जब आया, तब नवाज शरीफ अपनी बीमार पत्नी कुलसुम के इलाज के सिलसिले में लंदन में थे और मरियम भी साथ थीं। विरोधियों के मन में शक था कि नवाज शरीफ शायद देश न लौटें, लेकिन उन्होंने वतन के लिए कुबार्नी देने के भावुक बयान के साथ अपनी वापसी का ऐलान किया। आये भी, लेकिन अब सियासी दुनिया में उनकी वापसी और जेल जाने को लेकर कई अर्थ निकले गये। एक वर्ग यह मानकर चल रहा था कि मामला जिस तरह से निपटाया जा रहा है, उससे आम लोगों के मन में नवाज के प्रति सहानुभूति बढ़ेगी। गिरफ्तारी के दिन उनके समर्थन में लाहौर में उमड़ा जन सैलाब इसका सबूत दे भी रहा था। वहां की जनता मामले के पीछे सैन्य शासन की आहट सुन रही थी, जो पाक मतदाताओं को मंजूर नहीं बताया जा रहा था। पूर्व प्रधानमंत्री की गिरफ्तारी की गूंज इतनी जबरदस्त रही कि उसी दिन बलूचिस्तान प्रांत के माचतुंग निर्वाचन क्षेत्र में बलूच अवाम पार्टी के नेता सिराज रायसानी की रैली के आत्मघाती हमले में 128 लोगों की मौत और सवा सौ से ऊपर लोगों के घायल होने की खबर आयी-गयी बात हो गयी। नवाज की गिरफ्तारी, उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी, जेल में मिलने वाली सुविधाओं में कमी जैसी चटपटी खबरों के ढोल के बीच यह भुला दिया गया कि पाकिस्तान किस नाजुक मुकाम पर खड़ा है। भ्रष्टाचार, आतंकवाद और तानाशाही का खतरा सिर पर है। चुनावी दहशत की तान से पूरा देश थर्राया हुआ है। आमजन के खून से धरती लाल है, लेकिन वहां के राजनीतिक दलों को देश से ज्यादा अपनी चिंता है, जहां आरोपों से घिरे पाकिस्तानी सियासत के सफल खिलाड़ी पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को लग रहा था कि उनके पासे फिर कामयाब होंगे, लेकिन सत्ता के प्रबल दावेदार इमरान खान ने उनके पैरों तले से कालीन खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ी। रही-सही कसर उन्हें सेना के मिले साथ ने पूरी कर दी। तहरीके इंसाफ पार्टी (नवाज) मुस्लिम लीग से पीछे लग रही थी, लेकिन बाजी अंतत: इमरान खान की तहरीके इंसाफ पार्टी के ही हाथ रही। एक बड़ा पेंच दहशतगर्द हाफिज सईद भी था, जिसके प्रतिबंधित संगठन जमात उद्दावा के राजनीतिक मोर्चा एमएमएल के भी प्रतिबंधित हो जाने के बाद वह अल्लाह हो अकबर तहरीक के नाम से चुनावी मैदान में था। इनमें से हर कोई किसी भी कीमत पर केवल जीत चाहता था। ऐसे में अभिशप्त पाकिस्तान का भविष्य कैसे संवरेगा, यह यक्ष प्रश्न उठ खड़ा हुआ। जिस आम चुनाव पर देश-दुनिया की निगाहें जमी थीं, उसमें अब बाजी इमरान की तहरीके इंसाफ पार्टी के हाथ लगी। माना जा रहा है कि वहां की जनता की राय पाकिस्तान के साथ दुनिया भर के राजनीतिक संबंधों को भी प्रभावित करेगी। इसलिए सभी को चिंता थी कि पाकिस्तान की भावी डगर क्या होगी?
इमरान के हक में गए चुनाव परिणाम के बाद भी पाक में सियासत के नाम पर जारी खूनी खेल एक ऐसा सवाल है, जिसका जवाब दुनिया पाकिस्तान की अवाम और सियासतदानों से मांग रही है कि इस काली रात की भोर आखिर कब होगी? अब जब चुनाव परिणाम सेना की पसंद इमरान खान और उनकी पार्टी के पक्ष में आ गये हंै तो प्रतीत होने लगा है कि निकट भविष्य में वहां आमजन का भाग्य नहीं बदलने वाला!

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